रांची : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में सोमवार को मरांग बुरू बचाओ संघर्ष समिति (संथाल समाज) के 51 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मरांग बुरू (पारसनाथ पर्वत), गिरिडीह को संथाल आदिवासियों के धार्मिक तीर्थ स्थल के रूप में संरक्षित करने तथा इसके प्रबंधन की जिम्मेवारी ग्राम सभा को सौंपने की मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखी।
मरांग बुरू को लेकर दी गयी ऐतिहासिक और कानूनी जानकारी
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि मरांग बुरू को संथाल समुदाय युगों-युगों से ईश्वर के रूप में पूजता आया है। इसे धार्मिक स्थल घोषित करने की मांग के पीछे उनका प्रथागत अधिकार है, जो उन्हें छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, कोर्ट के निर्णय और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त है।
आदिवासी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा हेतु विशेष कानून की मांग
प्रतिनिधियों ने कहा कि मरांङ बुरू सहित लुगू बुरू, जाहेर थान, माँझी थान, मसना, हड़गड़ी जैसे आदिवासी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए “आदिवासी धार्मिक स्थल संरक्षण अधिनियम” बनाया जाए। साथ ही केंद्र की पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना, जिसमें पारसनाथ को पारिस्थितिकी संवेदी क्षेत्र (Eco Sensitive Zone) घोषित किया गया है, बिना ग्राम सभा की सहमति के असंवैधानिक बताया और इसे रद्द करने की मांग की।
अवैध निर्माण हटाने और राजकीय महोत्सव की घोषणा की अपील
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि जैन समुदाय द्वारा मरांङ बुरू में कथित रूप से अवैध मठ, मंदिर और धर्मशालाएं बनाई गई हैं, जिन्हें अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। साथ ही फागुन शुक्ल पक्ष तृतीय तिथि को मनाए जाने वाले “मरांङ बुरू युग जाहेर, वाहा-बोंगा पूजा महोत्सव” को राजकीय महोत्सव घोषित करने की मांग भी की गई।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया : होगी विधिसम्मत कार्रवाई
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों की विधिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से गहन समीक्षा कर उचित कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान राज्य मंत्री फागू बेसरा, समिति अध्यक्ष रामलाल मुर्मू, साहित्यकार भोगला सोरेन समेत कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।