रांची : झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें और उनके परिवार को हेमंत सोरेन सरकार से जान का खतरा है। गिरिडीह परिसदन में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए मरांडी ने दावा किया कि विश्वस्त सूत्रों से उन्हें जानकारी मिली है कि एक बार फिर से उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है।
मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार के कुछ भ्रष्ट और आपराधिक प्रवृत्ति के अधिकारियों ने उन्हें डराने और शांत कराने के लिए सुपारी ली है। उन्होंने कहा कि उन पर कभी भी हमला हो सकता है। उनके खिलाफ झूठे मुकदमे, स्टिंग ऑपरेशन और चरित्र हनन की साजिश रची जा रही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वे सिर्फ नेता प्रतिपक्ष के रूप में नहीं, बल्कि उन तमाम झारखंडवासियों की आवाज के रूप में खड़े है, जिन्हें इस भ्रष्ट और भयभीत सरकार ने ठगा है, डराया है और चुप कराने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि उनकी सक्रियता और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर रुख से कुछ अधिकारी परेशान हैं और अब उनके खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं।
सरकार की ‘लूट-खसोट’ की नीतियों को करता रहूंगा उजागर
मरांडी ने चेतावनी दी कि वह भ्रष्टाचार और लूट-खसोट के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने छत्तीसगढ़-झारखंड शराब घोटाले, बालू-पत्थर-जमीन माफिया, कोयला चोरी और अवैध खनन जैसे मुद्दों को उजागर किया है। साथ ही, जेएसएससी और जेपीएससी में घोटाले तथा ग्रामीण योजनाओं की बंदरबांट के मुद्दों को भी लगातार उठाया है।
2013 में भी हुई थी हत्या की साजिश
बाबूलाल मरांडी ने याद दिलाया कि वर्ष 2013 में भी उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा गया था, जब केंद्र और राज्य में यूपीए की सरकार थी। उस समय दुमका के शिकारीपाड़ा क्षेत्र में उनकी हत्या के लिए नक्सलियों को सुपारी दी गई थी। बाद में खुफिया रिपोर्ट के आधार पर उनकी सुरक्षा में सीआरपीएफ की तैनाती की गई थी।
‘लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज दबाना सबसे बड़ा अपराध’
मरांडी ने कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाना लोकतंत्र में सबसे बड़ा अपराध है। उन्होंने कहा, सरकार यदि यह सोचती है कि मुझे डराकर चुप करा देगी, तो यह उनकी भूल है। हम सब मिलकर इस लड़ाई को लड़ेंगे और सच्चाई को सामने लाते रहेंगे। बाबूलाल मरांडी के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अगर उनकी सुरक्षा को लेकर किसी तरह की चूक होती है, तो यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।